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कर्ण पिशाचिनी-एक अनोखी कहानी Part-2

साधक मान जाते हैंऔर उस बुढे अघोरियो के गुरु के पास रहते हैं और उन गुरुओं से वो बहुत सारे तंत्र मंत्र का ज्ञान सीखते हैं और समय इस तरह से वक्त गुज़रता है और साधक कई तंत्र विद्याओं और कलाओं में माहिर हो जाते हैं फिर भी साधक को वो नहीं मिल पा रहा था जो उन्हें चाहिए था तो साधक फिर भी अपनी विद्या में लगे हुए थे फिर एक दिन वो बुड्ढे अघोरी उन्हें बुलाते हैं और कहते हैं कि मैं तुम्हें कुछ देना चाहता हूं जो मेरे पास है पर साधक समझ नहीं पाता कि वो गुरु अघोरी उन्हें क्या देना चाहता है पर देने से पहले वो साधक को उस लायक बनने को कहते है ताकि उसे संभाल सके.

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